जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए मिसाइल हमले के एक दिन बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जोरदार जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि यह हमला पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की ईरानी कोशिश का सशक्त जवाब है।
सेंटकॉम ने बताया कि अमेरिकी समयानुसार रात 8 बजे से ईरान के भीतर चुनिंदा ठिकानों पर सैन्य हमले शुरू किए गए। बयान में कहा गया कि ये कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। यह लगभग एक सप्ताह बाद ईरान की धरती पर अमेरिका की पहली सीधी सैन्य कार्रवाई है। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने के लिए प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया था।
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ "बहुत सख्त कार्रवाई" करेगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश बैलिस्टिक मिसाइलों को समय रहते सफलतापूर्वक रोक दिया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने बेहद कम समय में वास्तविक समय के आधार पर जवाबी रक्षा अभियान चलाया।
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उधर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे और सेंटकॉम केंद्र पर हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरान के सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के अनुसार, आईआरजीसी ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की पुष्टि करते हुए इसे अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ जवाबी कदम बताया।
आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि जब तक ईरान के खिलाफ अमेरिकी धमकियां और उसके हितों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक प्रतिरोध भी जारी रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते इस सैन्य तनाव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
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