उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के बाद सूची से हटाए गए दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नामों की दोबारा जांच की जाएगी। चुनाव आयोग इस अभियान के तहत उन लोगों की मौजूदा स्थिति का पता लगाएगा, जिनके नाम पुरानी मतदाता सूची में दर्ज थे, लेकिन नई सूची में नहीं हैं।
एसआईआर से पहले उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में लगभग 15.44 करोड़ मतदाता थे। पुनरीक्षण के बाद संख्या में दो करोड़ से अधिक की कमी आई। ऐसे मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि वाली श्रेणी यानी एएसडीडी में रखा गया था।
अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। वे 10 अप्रैल को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची का मिलान 7 जनवरी 2025 की सूची और उसकी पूरक सूचियों से करेंगे। पुरानी सूची में नाम होने, लेकिन नई सूची में नहीं मिलने वाले लोगों की अलग सूची तैयार की जाएगी।
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यह सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) के साथ भी साझा की जाएगी, ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान में सहयोग मिल सके।
पहली बार मतदान करने के योग्य युवाओं और अन्य पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरवाया जाएगा। इसके लिए बूथ स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
अभियान में बेघर लोगों, रैन बसेरों में रहने वालों, मजदूर बस्तियों के निवासियों और वंचित समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षण संस्थानों और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
चुनाव आयोग मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों, जनसंपर्क और नियमित प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से लोगों को नाम जुड़वाने की प्रक्रिया बताएगा। अभियान का उद्देश्य छूटे हुए पात्र नागरिकों की पहचान करना और उन्हें मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का अवसर देना है।
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