उत्तराखंड हाईकोर्ट को नए स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए प्रस्तावित परियोजना को वन सलाहकार समिति ने वन भूमि से जुड़ी चिंताओं के आधार पर दोबारा खारिज कर दिया है। यह दूसरी बार है जब समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार किया है।
समिति ने अपने निर्णय में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह वन भूमि पर निर्माण के लिए मंजूरी हासिल करने से पहले इस बात की संभावना तलाशे कि प्रस्तावित परियोजना को किसी उपयुक्त गैर-वन भूमि पर स्थापित किया जा सकता है या नहीं। समिति का मानना है कि यदि परियोजना के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध है, तो वन क्षेत्र का उपयोग करने से बचा जाना चाहिए।
यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट की मौजूदा इमारत और परिसर से जुड़ी आवश्यकताओं को देखते हुए नए स्थान पर स्थानांतरण की योजना से जुड़ा है, जिसके लिए राज्य सरकार ने वन भूमि के उपयोग का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, वन सलाहकार समिति ने पर्यावरणीय और वन संरक्षण संबंधी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
और पढ़ें: राहुल गांधी की अपील- पुलिस और लाठियों से न डरें, 1 नवंबर को INDIA गठबंधन के चलो दिल्ली मार्च में शामिल हों
समिति के इस रुख से स्पष्ट है कि वन भूमि के उपयोग को लेकर अब पहले से अधिक सतर्कता बरती जा रही है, और किसी भी परियोजना के लिए वन क्षेत्र के इस्तेमाल को अंतिम विकल्प के रूप में ही स्वीकार किया जाएगा। इससे पहले भी समिति इसी तरह की आपत्तियों के साथ प्रस्ताव को लौटा चुकी है, जिसके बाद राज्य सरकार को संशोधित प्रस्ताव के साथ दोबारा आवेदन करना पड़ा था।
अब राज्य सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह हाईकोर्ट के स्थानांतरण के लिए ऐसी गैर-वन भूमि की पहचान करे, जो परियोजना की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। जब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वन भूमि पर निर्माण की मंजूरी मिलना मुश्किल दिख रहा है।
इस फैसले का सीधा असर उत्तराखंड हाईकोर्ट के स्थानांतरण की समयसीमा पर पड़ सकता है, क्योंकि नई भूमि की तलाश और उसके लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने में अतिरिक्त समय लग सकता है। वन संरक्षण और न्यायिक अवसंरचना की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना अब राज्य सरकार के लिए प्राथमिकता बन गई है।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में आगे की रणनीति को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि गैर-वन भूमि के विकल्पों की तलाश जल्द शुरू की जाएगी ताकि परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके।
और पढ़ें: गाजियाबाद में 30 अक्टूबर को 12वीं तक के सभी स्कूल बंद, पीईटी-2026 परीक्षा के चलते फैसला