‘वंदे मातरम्’ और ‘तमिल थाई वाज्हथु’ को लेकर तमिलनाडु में आधिकारिक कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल पर चर्चा तेज हो गई है। विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि सरकारी और सार्वजनिक समारोहों में ‘तमिल थाई वाज्हथु’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ का गायन किस क्रम में किया जाना चाहिए।
यह मामला तब सामने आया जब मद्रास हाईकोर्ट ने अपने स्वतंत्रता दिवस समारोह के कार्यक्रम में बदलाव करते हुए शुरुआत में ‘तमिल थाई वाज्हथु’ को शामिल किया। इससे पहले अदालत की ओर से जारी कार्यक्रम संबंधी परिपत्र में इसे शामिल नहीं किए जाने पर मदुरै पीठ बार एसोसिएशन ने चिंता जताई थी।
मद्रास हाईकोर्ट के कार्यक्रम में बदलाव का घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब कुछ दिन पहले तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर ‘तमिल थाई वाज्हथु’ को राज्य के आधिकारिक समारोहों में सबसे पहले प्रस्तुत किए जाने वाला गीत बनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस संबंध में सरकारी आदेश भी जारी किया।
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इस फैसले के बाद राज्य गीत और राष्ट्रीय गीतों के बीच आधिकारिक प्रोटोकॉल को लेकर बहस शुरू हो गई है।
‘तमिल थाई वाज्हथु’ क्या है?
‘तमिल थाई वाज्हथु’ तमिल भाषा और तमिल मातृभूमि को समर्पित एक प्रार्थना गीत है। तमिलनाडु में इसे राज्य के महत्वपूर्ण आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत में प्रस्तुत किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा इसे समारोहों में प्राथमिकता देने के फैसले के बाद इसका प्रोटोकॉल और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
वहीं, ‘वंदे मातरम्’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जबकि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान है। तीनों की अपनी अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमिका है।
वर्तमान विवाद इस बात पर केंद्रित है कि आधिकारिक समारोहों में इन गीतों का क्रम क्या होना चाहिए और राज्य सरकार द्वारा तय प्रोटोकॉल किस तरह राष्ट्रीय स्तर के प्रोटोकॉल के साथ लागू होगा।
मद्रास हाईकोर्ट द्वारा स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में बदलाव ने इस विषय को फिर से सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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