पूर्व भारतीय राजनयिक वीणा सीकरी ने कहा कि भारत दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को केवल पाकिस्तान की वजह से नहीं रोक रहा है, बल्कि यह आतंकवाद के सिद्धांतगत मुद्दे से जुड़ा मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक आतंकवाद को लेकर स्पष्ट और ठोस रुख नहीं अपनाया जाता, तब तक SAARC जैसे क्षेत्रीय संगठन प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकते।
वीणा सीकरी ने कहा कि भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग तभी सफल हो सकता है जब सदस्य देशों के बीच विश्वास और सुरक्षा का माहौल हो। यदि किसी देश की धरती का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है, तो इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा दक्षिण एशिया में सहयोग, विकास और शांति को बढ़ावा देने का समर्थन किया है, लेकिन आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वीणा सीकरी के अनुसार, भारत का यह रुख केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सिद्धांत आधारित है।
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पूर्व राजनयिक ने कहा कि SAARC की प्रगति में रुकावट का मुख्य कारण क्षेत्र में आतंकवाद और सीमा पार हिंसा है। उन्होंने कहा कि यदि सदस्य देश ईमानदारी से आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करें, तो संगठन दोबारा सक्रिय और प्रभावी बन सकता है।
राजनीतिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वीणा सीकरी का यह बयान भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है।
हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में तनाव बना हुआ है, जिसका असर क्षेत्रीय मंचों पर भी देखने को मिला है। ऐसे में यह बयान दक्षिण एशियाई कूटनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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