जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “सबसे खराब शासन प्रणाली” बताया है। उन्होंने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई और कहा कि चुनी हुई सरकार को प्रशासन पर पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए।
एक साक्षात्कार में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे बड़े और संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकती, जहां निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास प्रशासनिक फैसलों की पूरी जिम्मेदारी न हो। उन्होंने कहा कि दोहरी सत्ता संरचना भ्रम और प्रशासनिक अक्षमता पैदा करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मामलों में चुनी हुई सरकार को निर्णय लेने से दूर रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि 90 विधायकों वाली विधानसभा की तुलना छोटे केंद्र शासित प्रदेशों से कैसे की जा सकती है।
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उमर अब्दुल्ला ने पहलगाम त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्ष की घटनाओं के बाद भी यदि मौजूदा व्यवस्था को सही माना जा रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिर और जवाबदेह शासन तभी संभव है, जब निर्वाचित सरकार को पूर्ण अधिकार दिए जाएं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ समूह जम्मू और श्रीनगर के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके प्रयास सफल नहीं हुए। उमर अब्दुल्ला ने पारंपरिक “दरबार मूव” व्यवस्था की वापसी को दोनों क्षेत्रों के बीच एकता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र के साथ प्रशासनिक शक्तियों को लेकर बातचीत में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने तक अपनी मांग जारी रखेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमर अब्दुल्ला का यह बयान जम्मू-कश्मीर की राजनीति में राज्य के अधिकारों और लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर बहस को फिर तेज कर सकता है।
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