पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में कथित बगावत की चर्चाओं के बीच अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर भी नए राजनीतिक दावे सामने आ रहे हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी में जल्द ही बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सपा के कुछ सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संपर्क में हैं। वहीं केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि 25 से 26 सपा सांसद अलग होने के लिए तैयार हैं और 2027 के विधानसभा चुनावों में यह स्थिति और स्पष्ट होगी।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी में शिवसेना या टीएमसी जैसी बड़ी टूट की संभावना बेहद कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का मजबूत नेतृत्व और पार्टी पर उनकी पकड़ मानी जा रही है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। इस सफलता का बड़ा श्रेय अखिलेश यादव के नेतृत्व को दिया गया।
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सपा के अधिकांश सांसद पहली बार संसद पहुंचे हैं और उनकी राजनीतिक पहचान पार्टी तथा अखिलेश यादव से जुड़ी हुई है। इसके अलावा दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी संसदीय दल में वैध विभाजन के लिए दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। सपा के 37 सांसदों में से लगभग 25 सांसदों का एक साथ अलग होना बेहद कठिन माना जाता है।
राजनीतिक रूप से भी सपा की संरचना अन्य क्षेत्रीय दलों से अलग है। पार्टी का संगठन, वोट बैंक और नेतृत्व पूरी तरह अखिलेश यादव के इर्द-गिर्द केंद्रित है। वर्तमान में पार्टी में ऐसा कोई समानांतर शक्ति केंद्र दिखाई नहीं देता जो बड़ी संख्या में सांसदों को अपनी ओर आकर्षित कर सके। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन बड़े स्तर पर टूट फिलहाल आसान नहीं है।
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