केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महिलाओं का सशक्तिकरण सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक देश की आधी आबादी को समान अवसर और भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक समग्र विकास की कल्पना अधूरी रहेगी।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि कार्यबल में महिलाओं की समान भागीदारी केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह आर्थिक मजबूती के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “महिलाओं को सशक्त बनाना विकसित भारत के निर्माण का केंद्रीय तत्व है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहा है और ऐसे में महिला शक्ति का योगदान और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता और तकनीक जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश की विकास गति को नई दिशा दे रही है।
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मांडविया ने यह भी उल्लेख किया कि सरकार महिलाओं के लिए कई योजनाएं और नीतियां लागू कर रही है, जिनका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे लाना है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण से न केवल परिवार मजबूत होते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र भी अधिक सशक्त बनते हैं।
उन्होंने युवाओं और विशेषकर महिलाओं से अपील की कि वे आगे बढ़कर अवसरों का लाभ उठाएं और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका कहना था कि जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो पूरा समाज प्रगति करता है।
मांडविया ने यह भी कहा कि आने वाले समय में भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में महिलाओं की भूमिका निर्णायक साबित होगी। इसलिए सरकार का लक्ष्य है कि हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
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