चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मध्य पूर्व में जारी युद्ध को लेकर अमेरिका पर परोक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष न तो किसी उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है और न ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप है।
भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई वैश्विक नेता मौजूद हैं। शी जिनपिंग ने कहा कि मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति लगातार बदल रही है और युद्ध के कारण क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
चीनी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों से संप्रभुता के उल्लंघन का विरोध करने और वैश्विक शांति की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करना चाहिए। साथ ही उन्होंने ब्रिक्स देशों से वैश्विक हॉटस्पॉट मुद्दों के समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की।
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शी ने सभी प्रकार के संरक्षणवाद का विरोध करने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया जाना चाहिए और किसी भी तरह के संरक्षणवादी कदमों को खारिज किया जाना चाहिए।
शी जिनपिंग की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चीन और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। बीजिंग ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अमेरिका ने तेहरान से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की भी मांग की है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह महत्वपूर्ण जलमार्ग वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
ईरान का कहना है कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण है। तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए बताता रहा है तथा अमेरिका को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करने के खिलाफ चेतावनी देता रहा है।
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