आंध्र प्रदेश में शिक्षक भर्ती परीक्षा डीएससी को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के विधान परिषद सदस्यों ने गठबंधन सरकार को डीएससी में कथित अनियमितताओं पर विधान परिषद में खुली बहस की चुनौती दी है। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
वाईएसआरसीपी एमएलसी ने सवाल उठाया कि शिक्षा मंत्री नारा लोकेश विधान परिषद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय विधानसभा में प्रस्तुतियां क्यों दे रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने पूछा कि यदि सरकार को डीएससी भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने का भरोसा है, तो वह विधान परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा से पीछे क्यों हट रही है।
वाईएसआरसीपी नेताओं ने कहा कि शिक्षक भर्ती परीक्षा से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएससी से संबंधित कई सवालों पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।
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एमएलसी ने गठबंधन सरकार से मांग की कि वह विधान परिषद में डीएससी से जुड़े सभी आरोपों पर विस्तृत चर्चा कराए और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है तो स्वतंत्र जांच से उसे डरना नहीं चाहिए।
वाईएसआरसीपी ने कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग दोहराई। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्वतंत्र एजेंसी से जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सकेगी।
विपक्ष ने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि डीएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान किस तरह किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर आंध्र प्रदेश की राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है।
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