तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टैसमैक) ने शुक्रवार 10 जुलाई 2026 को मद्रास हाईकोर्ट को बताया कि वह शराब की खाली बोतल वापसी योजना के तहत ग्राहकों से ली जाने वाली ₹10 की वापसी योग्य जमा राशि (रिफंडेबल डिपॉजिट) को प्रत्येक शराब की बोतल के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
टैसमैक की ओर से अदालत को बताया गया कि खाली शराब की बोतलों की वापसी और पुनर्चक्रण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाने का प्रस्ताव है। निगम ने इस मामले में महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) से कानूनी राय लेने के बाद प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेज दिया है।
मद्रास हाईकोर्ट की विशेष पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार और न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती शामिल थे, के समक्ष टैसमैक ने अपनी योजना की जानकारी दी। निगम ने बताया कि यदि शराब निर्माताओं को बोतल की एमआरपी में ₹10 बढ़ाने की अनुमति दी जाती है, तो खाली बोतलों के संग्रह, परिवहन, पुनर्चक्रण और निपटान की जिम्मेदारी भी उन्हीं निर्माताओं को दी जा सकती है।
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टैसमैक का कहना है कि इस व्यवस्था से शराब की खाली बोतलों के प्रबंधन में सुधार होगा और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकेगा। वर्तमान में खाली बोतलों के निपटारे और उनके दोबारा उपयोग को लेकर कई चुनौतियां सामने आती रही हैं।
बोतल वापसी योजना का उद्देश्य ग्राहकों को खाली बोतल लौटाने के लिए प्रोत्साहित करना और कचरे को कम करना है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर ग्राहक बोतल खरीदते समय अतिरिक्त ₹10 जमा करेंगे, जिसे खाली बोतल वापस करने पर लौटाया जा सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने टैसमैक की ओर से पेश प्रस्ताव पर ध्यान दिया। अब राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेगी। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो तमिलनाडु में शराब बिक्री और खाली बोतल प्रबंधन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आ सकता है।
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