कर्नाटक की राजनीति में उस समय नई बहस छिड़ गई जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना ने कहा कि “सिद्धारमैया के बिना कांग्रेस को वोट नहीं मिल सकते।” इस बयान पर कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस की सफलता किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह पार्टी की 140 वर्षों की मजबूत संगठनात्मक विरासत का परिणाम है।
राजन्ना ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की खुलकर प्रशंसा करते हुए उन्हें कांग्रेस का सबसे बड़ा चुनावी चेहरा बताया। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया एक “मास पुलर” हैं और उन्हीं के कारण कांग्रेस को कर्नाटक में वोट मिल रहे हैं। राजन्ना के अनुसार, उनके निजी विचार में यदि सिद्धारमैया न हों तो कांग्रेस को समर्थन मिलना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि, प्रियंक खड़गे ने इस सोच को पार्टी की भूमिका को कमतर आंकने वाला बताया। उन्होंने कहा, “जब आपको बी-फॉर्म चाहिए होता है, तब कांग्रेस पार्टी की जरूरत पड़ती है। चुनाव के दौरान पार्टी का नेतृत्व, उसके विचार और सिद्धांत अहम होते हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद पार्टी पर सवाल उठाना गलत है, चाहे वह कोई भी करे।”
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खड़गे ने आगे कहा कि कांग्रेस कभी भी व्यक्ति-केंद्रित पार्टी नहीं रही है। “कांग्रेस की 140 साल की विरासत है, जिसमें नेतृत्व हमेशा उभरता रहा है और आगे भी उभरता रहेगा। यह पार्टी किसी एक व्यक्ति की वजह से नहीं है और न ही किसी एक व्यक्ति के लिए है”।
यह बयान ऐसे समय आया है जब सिद्धारमैया ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री डी. देवराज़ उर्स को पीछे छोड़ते हुए राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना लिया है। इस उपलब्धि के बीच कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन की भूमिका को लेकर यह बहस राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
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