जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) में कैबिनेट विस्तार के बाद अंदरूनी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मंत्रिमंडल में पदों के बंटवारे से नाराज बताए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने दावा किया है कि एनसी के 16 विधायक नेतृत्व के फैसलों से असंतुष्ट हैं। वहीं, 27 अक्टूबर को चार मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में 11 विधायक शामिल नहीं हुए।
पार्टी के वरिष्ठ नेता और छह बार विधायक रह चुके मुबारक गुल की नाराजगी भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उन्हें पार्टी महासचिव का पद देने की पेशकश की गई थी, लेकिन इससे उनकी शिकायतें दूर नहीं हुईं। उनके समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उनसे पार्टी छोड़ने की मांग की।
मुबारक गुल के समर्थकों ने उठाए सवाल
मुबारक गुल के बेटे यूनुस गुल ने पार्टी के फैसले पर असंतोष जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ईदगाह के नेशनल कॉन्फ्रेंस ब्लॉक सचिव के तौर पर बोल रहे हैं। यूनुस के मुताबिक, उनके पिता विधानसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में शामिल हैं और उन्हें 32 से 35 वर्षों का विधायी अनुभव है।
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उन्होंने कहा कि यह केवल मुबारक गुल का अधिकार नहीं, बल्कि ईदगाह विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का भी अधिकार है। पार्टी कार्यकर्ता उनके साथ हुए व्यवहार से नाराज हैं।
कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की चर्चा
अब्दुल मजीद लारमी, नजीर गुरेजी, हिलाल अकबर लोन और अर्जुन सिंह राजू सहित कुछ अन्य नेताओं के भी असंतुष्ट होने की खबरें हैं। हालांकि, इन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया है।
बीजेपी का 16 विधायकों के नाराज होने का दावा
बीजेपी प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल विस्तार ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर मतभेद उजागर कर दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि कम से कम 16 नेता पार्टी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं और आने वाले दिनों में असंतोष बढ़ सकता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और एनसी ने सामूहिक रूप से नेताओं के पार्टी छोड़ने की बात स्वीकार नहीं की है।
अल्ताफ कालू ने किया मतभेद से इनकार
एनसी विधायक अल्ताफ कालू ने पार्टी में बड़े संकट की खबरों को खारिज किया। अनंतनाग में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट और मजबूत है। उनके मुताबिक, राजनीतिक संगठनों में छोटी-मोटी नाराजगी होना सामान्य है, लेकिन इसे बड़े संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
3 नवंबर पर टिकी नजरें
श्रीनगर के सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह के राजनीतिक भविष्य को लेकर 3 नवंबर की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अटकलें हैं कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस या अपनी संसदीय सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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