मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद मुंबई की राजनीति में एक बार फिर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” की चर्चा तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने कहा है कि नगर निगम चुनाव तो खत्म हो गए हैं, लेकिन “असली राजनीति अभी बाकी है”।
बीएमसी चुनाव में भाजपा ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, जबकि ठाकरे परिवार को अपने पारंपरिक गढ़ मुंबई में झटका लगा है। हालांकि, अब सियासी फोकस महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे पर आ गया है। 2022 में शिवसेना में बगावत कर उद्धव ठाकरे सरकार गिराने वाले शिंदे अब भाजपा के सहयोगी हैं और इस चुनाव में उनकी पार्टी ने 29 सीटें जीती हैं।
नतीजों के बाद शिंदे गुट द्वारा अपने पार्षदों को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में ठहराए जाने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। 227 वार्डों वाली बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है। भाजपा को 89 और शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं। इस तरह दोनों के पास मिलकर 118 सीटें हैं, जो बहुमत से अधिक है। अजित पवार की एनसीपी को तीन सीटें मिली हैं, जो समर्थन दे सकती है।
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दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी), मनसे और एनसीपी (शरद पवार) को मिलाकर 72 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को 24, एआईएमआईएम को आठ और समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिली हैं। विपक्ष अगर एकजुट होता है तो कुल संख्या 106 तक पहुंच सकती है, जो बहुमत से आठ कम है।
इसी गणित के चलते शिंदे गुट कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। मेयर पद को लेकर भी एनडीए में खींचतान की अटकलें हैं। भाजपा जहां अपना मेयर चाहती है, वहीं शिंदे पर शिवसेना की दशकों पुरानी परंपरा बनाए रखने का दबाव है।
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा गया कि शिवसेना ने मुंबई को 23 मराठी महापौर दिए हैं और सवाल उठाया गया कि क्या यह परंपरा जारी रहेगी। संपादकीय में कहा गया कि चुनाव खत्म हो गए हैं, लेकिन असली सियासी लड़ाई अब शुरू होगी।
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