अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अपने बैंक खातों में जमा बड़ी रकम का स्रोत स्पष्ट नहीं कर पाए हैं।
जांच में सामने आया है कि मंदिर में दान की चोरी कोई नई घटना नहीं थी, बल्कि यह लंबे समय से चल रही थी। पुलिस और एसआईटी के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में यह साफ हुआ कि उनके बैंक खातों में जमा धनराशि कहां से आई, इसका कोई संतोषजनक जवाब वे नहीं दे सके।
जांच अधिकारियों ने केवल पिछले 45 दिनों की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की, जिसके बाद आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि यह गड़बड़ी काफी लंबे समय से चल रही थी।
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जांच में यह भी सामने आया कि चोरी की गई रकम का इस्तेमाल या तो बैंक खातों में जमा करने या संपत्ति खरीदने में किया गया। बैंक रिकॉर्ड इस मामले में सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आया है।
एसआईटी के अनुसार, प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान और उसके बाद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई, जिससे दान की राशि भी कई गुना बढ़ गई। इसी दौरान चोरी की घटनाएं भी तेज हो गईं।
जांच में यह भी पता चला कि पहले जहां दान गिनती के सख्त नियम लागू थे, जैसे बिना जेब के कपड़े पहनना, बाद में इन नियमों की अनदेखी होने लगी। सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई के कारण अनियमितताएं बढ़ीं।
2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में दान के लिए 40 दानपेटियां लगाई गई थीं और बेसमेंट में कलेक्शन सेंटर बनाया गया था, लेकिन समय के साथ नियमों का पालन कमजोर पड़ गया।
अधिकारियों का मानना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के बाद गड़बड़ी और बढ़ी। अब पुलिस बैंक खातों और लेनदेन की गहन जांच कर रही है।
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