प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच नई दिल्ली में हुई मुलाकात में भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और साझा हितों को रिश्तों का आधार बनाने पर सहमति जताई।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत और चीन के बीच सात प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी। इनमें संबंधों को दीर्घकालिक नजरिए से देखना, मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकना, सीमा विवाद का उचित और स्वीकार्य समाधान तलाशना, व्यापार एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना, दोनों देशों के लोगों के बीच आवागमन बढ़ाना, आर्थिक और कारोबारी समस्याओं का समाधान खोजना तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाना शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हैं, लेकिन इन्हें विवाद में बदलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, शी चिनफिंग ने कहा कि दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्यों के रूप में भारत और चीन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
और पढ़ें: रूस-यूक्रेन के बीच मध्यस्थता को तैयार पीएम मोदी और शी चिनफिंग, क्रेमलिन ने दी जानकारी
मोदी ने ब्रिक्स नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि विविधता हमारी पहचान होनी चाहिए और सहयोग हमारी प्रेरणा।
नई दिल्ली घोषणा भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि
नई दिल्ली घोषणा को प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। ब्रिक्स देशों ने संघर्षों के समाधान के लिए “संवाद और कूटनीति” पर जोर दिया। साथ ही वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप बनाए रखने की जरूरत बताई।
घोषणा में संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद, आईएमएफ और विश्व बैंक में सुधार तथा विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की मांग की गई। चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया।
ब्रिक्स ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, भुगतान प्रणाली की कनेक्टिविटी और न्यू डेवलपमेंट बैंक को मजबूत करने पर भी जोर दिया। समूह ने एकतरफा शुल्क, संरक्षणवाद और आर्थिक दबाव का विरोध किया।
भारत ने एमएसएमई पोर्टल, स्टार्टअप इनोवेशन फंड और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसी पहल आगे बढ़ाईं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों को भी प्रमुखता मिली। ब्रिक्स ने आतंकवाद और आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की।
और पढ़ें: शी चिनफिंग ने पीएम मोदी के ब्रिक्स गाला डिनर में क्यों नहीं लिया हिस्सा? जानें वजह