जापान में विदेशी नागरिकों के लिए सख्त किए गए नए वीज़ा नियमों ने वहां रह रहे प्रवासियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। राजधानी टोक्यो के एक छोटे से रेस्तरां में, जहां नेपाली मोमो की खुशबू फैली हुई है, बुधाथोकी सम्जना अपने उस कारोबार को देख रही हैं जिसे उन्होंने वर्षों की मेहनत से खड़ा किया था, लेकिन अब उसे खोने का खतरा सामने है।
सम्जना उन कई विदेशी उद्यमियों में से एक हैं, जिनके लिए जापान की नई नीतियां चिंता का कारण बन गई हैं। जापान में पहले से ही तेजी से बढ़ती वृद्ध आबादी और श्रमिकों की कमी के बावजूद, देश में आव्रजन (इमिग्रेशन) को लेकर विरोध बढ़ रहा है। इसी के चलते सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने वर्ष 2025 के अंत में बिज़नेस मैनेजर वीज़ा से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है।
इन नए नियमों का सीधा असर उन विदेशी नागरिकों पर पड़ रहा है, जिन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू कर जापान में अपनी जिंदगी बसाई है। अब कई लोगों को अपने वीज़ा स्टेटस और व्यवसाय को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
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टोक्यो के उस छोटे रेस्तरां में बैठकर सम्जना कहती हैं कि उन्होंने जापान में बेहतर भविष्य का सपना देखा था, लेकिन बदलते नियमों ने उनके सपनों को झटका दिया है। उनका कहना है कि अगर वीज़ा नवीनीकरण में दिक्कत आती है तो उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान एक तरफ श्रम संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर सख्त आव्रजन नीतियां विदेशी प्रतिभा और छोटे उद्यमियों के लिए बाधा बन सकती हैं। इससे न केवल प्रवासी समुदाय प्रभावित होगा बल्कि कई छोटे व्यवसाय भी बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
यह स्थिति जापान की आर्थिक जरूरतों और सामाजिक नीतियों के बीच बढ़ते विरोधाभास को उजागर करती है।
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