लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को मंगलवार को बड़ी गति मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के बीच परियोजना को लेकर सहमति बनी।
करीब 15,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना उत्तराखंड में यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य जल भंडारण, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति को बढ़ावा देना है। परियोजना से यमुना में पानी का प्रवाह बढ़ने और नदी के पुनर्जीवन में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
यह सहमति 16 जून को अमित शाह की अध्यक्षता में हुई पिछली बैठक के करीब तीन महीने बाद बनी है। उस बैठक में छह राज्यों ने परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। मंगलवार की बैठक में अधिकांश मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए। राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
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परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत छह राज्य साझा करेंगे। हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। उसका आवंटित पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा और दोनों राज्य हिमाचल के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे।
परियोजना से हरियाणा को 836 क्यूसेक, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है।
अब परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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