कई महीनों के लंबे गतिरोध के बाद लद्दाख के लोगों की मांगों और चिंताओं पर विचार के लिए गठित हाई पावर्ड कमेटी (HPC) की बैठक जनवरी के अंतिम में फिर से होने जा रही है। यह समिति गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा वर्ष 2023 में गठित की गई थी, ताकि लद्दाख क्षेत्र से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और समाधान का रास्ता निकाला जा सके।
इस हाई पावर्ड कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय कर रहे हैं। समिति का मुख्य उद्देश्य लद्दाख की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, भाषा, परंपराओं और पर्यावरण की रक्षा के लिए उपयुक्त कदमों पर विचार करना है। इसके साथ ही लद्दाख की भौगोलिक स्थिति और उसकी रणनीतिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक संरक्षण उपायों पर चर्चा करना भी समिति के दायरे में शामिल है।
HPC के कार्यक्षेत्र (चार्टर) में यह भी शामिल है कि लद्दाख को किस प्रकार के संवैधानिक संरक्षण दिए जा सकते हैं, ताकि वहां के लोगों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसमें भूमि, रोजगार, संस्कृति और स्थानीय पहचान से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।
और पढ़ें: अंकिता भंडारी हत्या मामले में उत्तराखंड CM ने CBI जांच की सिफारिश की
लद्दाख के नागरिक संगठन और जनप्रतिनिधि लंबे समय से केंद्र सरकार से संवाद की बहाली और ठोस आश्वासन की मांग कर रहे थे। बीते कुछ महीनों से समिति की बैठक न होने के कारण क्षेत्र में असंतोष और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। अब जनवरी के अंत में प्रस्तावित बैठक को इस गतिरोध को तोड़ने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बैठक में ठोस निर्णय और समयबद्ध रोडमैप सामने आता है, तो इससे लद्दाख के लोगों का विश्वास बहाल हो सकता है और केंद्र व स्थानीय नेतृत्व के बीच संवाद को नई गति मिल सकती है।
और पढ़ें: साउदर्न रेलवे के कोचिंग टर्मिनल विस्तार से चेन्नई, कोयम्बटूर और एर्नाकुलम से चलेंगी अधिक ट्रेनें