बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विपक्षी दलों पर दलित और बहुजन समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ दलित संगठनों को आगे कर विपक्ष बहुजन समाज के विभिन्न वर्गों को झूठे वादों, निराधार दावों और भ्रामक प्रचार के जरिए भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।
मायावती ने हाल के प्रदर्शनों और सड़क जाम को राजनीतिक तथा चुनावी नौटंकी करार दिया। उन्होंने कहा कि बसपा अन्य राजनीतिक दलों की तरह प्रदर्शन, सड़क जाम, हंगामा, सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने या हिंसक गतिविधियों के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करने में विश्वास नहीं करती।
मायावती ने कहा कि बसपा देश की एकमात्र वास्तविक आंबेडकरवादी पार्टी है, जो पूरी तरह राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज के गरीब, मजदूर, शोषित, पीड़ित और उपेक्षित वर्गों के कल्याण के लिए कार्य करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर चलती है और यही उसकी राजनीति की मूल भावना है।
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बसपा प्रमुख ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार बार बनी सरकारों के दौरान व्यापक जनकल्याण, विकास और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकारों ने अपराध नियंत्रण और सुशासन के क्षेत्र में बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किए थे।
वहीं, कांग्रेस ने मायावती के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि उनका बयान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भाषा से मेल खाता है। कांग्रेस का आरोप है कि मायावती ऐसे बयान देकर बहुजन और वंचित वर्गों की साझा राजनीतिक लड़ाई को कमजोर कर रही हैं।
मायावती और कांग्रेस के बीच इस बयानबाजी ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
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