दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों द्वारा कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि सीआरपीएफ ने आरएएफ के महानिरीक्षक (आईजी) को पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यह जांच 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई घटनाओं पर केंद्रित है। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे थे और कथित नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
सीआरपीएफ ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल औपचारिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (सीओआई) का गठन नहीं किया गया है। पहले प्रारंभिक जांच में तथ्यों की पुष्टि की जाएगी, उसके बाद आवश्यकता पड़ने पर विस्तृत जांच शुरू होगी।
और पढ़ें: लंदन के लग्जरी होटल में मृत मिले सऊदी राजकुमार, ड्रग्स और शराब की ओवरडोज से मौत की पुष्टि
जांच के दायरे में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई वीडियो और तस्वीरें भी शामिल हैं। इनमें नीली वर्दी पहने आरएएफ कर्मियों को हथियार लेकर चलते, लाठीचार्ज करते तथा भीड़ को नियंत्रित करते देखा जा सकता है। वहीं कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा आरएएफ जवानों पर हमला किए जाने के दृश्य भी सामने आए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि आरएएफ के दंगा नियंत्रण उपकरणों में 12 बोर पंप-एक्शन पेलेट गन शामिल हैं। मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार इनका इस्तेमाल केवल तब किया जा सकता है जब जवानों की जान को गंभीर खतरा हो। साथ ही इन्हें डिफ्लेक्टर की मदद से कमर के नीचे की ओर ही दागने का नियम है, ताकि गंभीर चोट से बचा जा सके।
प्रदर्शन के बाद कम से कम दो छात्रों को कथित पेलेट चोटों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उसके पास पेलेट गन नहीं हैं और प्रदर्शन के दौरान उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। आरएएफ और सीआरपीएफ ने भी अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है।
इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मीडिया के सामने एक घायल प्रदर्शनकारी को पेश करते हुए दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से उसकी आंख में गंभीर चोट लगी। राहुल गांधी ने सरकार पर सच्चाई छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पेलेट गन दोनों का इस्तेमाल किया गया।
उधर, सीआरपीएफ ने अपने अधिकारियों और जवानों को मीडिया से बातचीत नहीं करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक आरएएफ अधिकारी के कथित सोशल मीडिया पोस्ट की भी जांच की जा रही है कि कहीं उसने बल के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन तो नहीं किया।
और पढ़ें: शानदार वापसी के बाद छलका मयंक यादव का दर्द, बोले- चोटों ने बहुत कुछ सिखाया