स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। सोमवार सुबह न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अतिरिक्त समय में 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 16 साल बाद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल अतिरिक्त समय के 107वें मिनट में फेरान टोरेस ने किया। निको विलियम्स के शानदार क्रॉस को हेडर के जरिए वापस गोल के सामने पहुंचाया गया, जिस पर टोरेस ने नजदीक से गेंद को गोल में पहुंचाकर स्पेन को बढ़त दिला दी। यह गोल अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांदेज़ को दूसरे पीले कार्ड के बाद रेड कार्ड मिलने के कुछ मिनट बाद आया। इसके चलते अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा।
पूरे मुकाबले में स्पेन ने गेंद पर अपना दबदबा बनाए रखा। पहले हाफ में उसके पास 60 प्रतिशत से अधिक बॉल पजेशन रहा, जबकि अर्जेंटीना पूरी प्रतियोगिता के इस सबसे बड़े मुकाबले में एक भी शॉट लक्ष्य पर नहीं लगा सकी। हालांकि अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 11 बचाव किए, जो किसी फीफा विश्व कप फाइनल में सबसे अधिक सेव का रिकॉर्ड है। उन्होंने मार्क कुकुरेला, लामिन यामाल, निको विलियम्स, पेड्री और पाउ कुबार्सी के प्रयासों को विफल किया।
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स्पेन को 96वें मिनट में बढ़त मिल गई थी, लेकिन फाउल के कारण निको विलियम्स का गोल रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद स्पेन ने लगातार दबाव बनाए रखा और आखिरकार टोरेस के गोल से जीत दर्ज कर ली।
दूसरी ओर, अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी स्पेन की मजबूत रक्षा पंक्ति के सामने प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। अर्जेंटीना का आक्रमण पूरे मैच में संघर्ष करता नजर आया और टीम पेनल्टी शूटआउट तक मुकाबला ले जाने में भी सफल नहीं हो सकी। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप ट्रॉफी जीती, जबकि अर्जेंटीना का लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने का सपना टूट गया।
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