अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ जारी वार्ता में अमेरिका मजबूत स्थिति में है और तेहरान समझौता करने के लिए मजबूर हो गया है। वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों के सम्मान में आयोजित रोज़ गार्डन क्लब डिनर को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद अमेरिका की सौदेबाजी की क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, "हमने उन्हें पूरी तरह झुका दिया और अब हम पूरी ताकत के साथ बातचीत कर रहे हैं। ईरान यह अच्छी तरह जानता है। वह अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है और संभव है कि यह समझौता जल्द हो जाए।"
उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कार्रवाई करनी पड़ी, क्योंकि यदि यह कार्यक्रम सफल होता तो यह इज़राइल और पूरे मध्य पूर्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला हुआ है और वहां से तेल की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। उनके अनुसार, एक दिन में लगभग 1.9 करोड़ बैरल तेल का परिवहन हुआ, जो अब तक का सबसे अधिक स्तर है।
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करीब तीन महीने तक चले मध्य पूर्व संघर्ष के बाद इस महीने ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बीच एक शांति समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए गए। 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर संघर्ष रोकने पर सहमति जताई है। समझौते में ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने और अपने संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को सौंपने का आश्वासन दिया है।
समझौते के तहत ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त करने और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि, इस अतिरिक्त खर्च को लेकर अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी ने विरोध जताया है और अमेरिकी कांग्रेस से इसे मंजूरी नहीं देने की अपील की है।
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