भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में बल्लेबाजों के दबदबे ने क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। भारतीय टीम के 249 रन बनाने के बावजूद वेस्टइंडीज ने रांची में शुक्रवार को छह विकेट से मुकाबला जीत लिया। टीम ने 18.3 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। इसके बाद भारतीय लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने गेंदबाजों के लिए अनुकूल परिस्थितियों की जरूरत पर जोर दिया।
चहल ने सपाट पिचों, छोटी बाउंड्री और ओस के कारण गेंदबाजों के सामने आने वाली मुश्किलों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि जब पिच से गेंदबाजों को मदद नहीं मिलती और गीली गेंद पर पकड़ बनाना मुश्किल होता है, तब बल्लेबाजों को रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
250 रन भी नहीं आए काम
मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच विकेट पर 249 रन बनाए। हालांकि, वेस्टइंडीज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया। कप्तान शाई होप ने 45 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए, जबकि शेरफेन रदरफोर्ड ने 37 गेंदों पर 84 रन की पारी खेली। दोनों के बीच 120 रन की साझेदारी ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया।
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चहल ने कहा कि ऐसी पिचों पर गेंदबाजों के पास बहुत कम विकल्प बचते हैं। उन्होंने बताया कि पुरानी गेंद, ओस और छोटी होती बाउंड्री बल्लेबाजों के लिए परिस्थितियां आसान बना देती हैं। उन्होंने आईपीएल में भी बड़े लक्ष्य तेजी से हासिल किए जाने का उदाहरण दिया।
आईपीएल के इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर भी सवाल
चहल ने आईपीएल में बढ़ते स्कोर के लिए सपाट पिचों, छोटे मैदानों और इम्पैक्ट प्लेयर नियम को भी जिम्मेदार ठहराया। उनके मुताबिक, पहले छह ओवर में 50 रन बनना सामान्य माना जाता था और 170 से 180 रन का स्कोर चुनौतीपूर्ण होता था। अब पावरप्ले में 70 से 80 रन बनने से मुकाबले का रुख जल्दी बदल जाता है।
चहल ने कहा कि पिचों पर गेंदबाजों को भी मदद मिलनी चाहिए, ताकि खेल में प्रतिस्पर्धा बनी रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गेंदबाजों के कौशल का प्रभाव लगातार कम होता गया, तो उनके लिए अपनी क्षमता दिखाने के अवसर कैसे बचेंगे।
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