देश में खेल प्रशासन को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट) को आंशिक रूप से लागू कर दिया गया है। यह अधिनियम गुरुवार, 1 जनवरी 2026 से चुनिंदा प्रावधानों के साथ प्रभाव में आया। केंद्र सरकार ने जिन धाराओं को लागू किया है, उनसे राष्ट्रीय खेल बोर्ड (एनएसबी) और राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (एनएसटी) की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
यह अधिनियम 18 अगस्त 2025 को अधिसूचित किया गया था और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा खेल सुधार बताया है। आंशिक रूप से लागू किए गए प्रावधान राष्ट्रीय खेल निकायों की स्थापना और उनके प्रशासनिक ढांचे से जुड़े हैं। इनमें राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति, राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) और क्षेत्रीय खेल महासंघ शामिल हैं।
अधिनियम के तहत होने वाले चुनावों के बाद, सभी खेल निकायों की कार्यकारी समितियों में अधिकतम 15 सदस्य होंगे, जिनमें कम से कम दो ‘योग्य खिलाड़ी’ (स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ मेरिट – SOM) शामिल करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय खेल बोर्ड और राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण का गठन भी शुरू किया जाएगा।
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राष्ट्रीय खेल बोर्ड में एक अध्यक्ष और सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार ऐसे लोगों में से करेगी, जिन्हें खेल प्रशासन, खेल कानून, सार्वजनिक प्रशासन या संबंधित क्षेत्रों में अनुभव और विशेषज्ञता प्राप्त हो। इन नियुक्तियों के लिए खोज-सह-चयन समिति की सिफारिशें ली जाएंगी।
सरकार के अनुसार, अधिनियम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का उद्देश्य खेल प्रशासन की वैधानिक व्यवस्था में सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करना है। एनएसबी को राष्ट्रीय खेल महासंघों को मान्यता देने, उनके वित्तीय कामकाज की निगरानी करने और अनियमितताओं पर दंड लगाने का अधिकार होगा। सरकारी फंडिंग पाने के लिए महासंघों को एनएसबी से मान्यता लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल (NSEP) का भी गठन किया जाएगा, जो खेल निकायों के चुनावों का प्रबंधन करेगा। अधिनियम के नियमों में खिलाड़ियों को प्रशासन में लाने के लिए उपलब्धियों के आधार पर 10 स्तरों की व्यवस्था भी की गई है, जिससे अनुभवी खिलाड़ी खेल संचालन में अहम भूमिका निभा सकें।
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