भारतीय सिनेमा की दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी ने वर्ष 2013 में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए पद्म भूषण सम्मान को स्वीकार करने से इनकार कर सभी को चौंका दिया था। करीब पांच दशकों तक अनेक भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाने वाली एस. जानकी का मानना था कि यह सम्मान उन्हें बहुत देर से दिया गया।
वर्ष 2013 में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी, जिसमें एस. जानकी को पद्म भूषण के लिए चुना गया था। हालांकि उन्होंने यह सम्मान लेने से मना कर दिया।
उस समय एस. जानकी ने कहा था, "मैं यह नहीं कह रही कि किसी की गलती है या मुझे सरकार से कोई शिकायत है। मुझे खुशी है कि सरकार ने मेरे काम को सम्मान देने की कोशिश की। लेकिन यह सम्मान बहुत देर से मिला है।"
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उन्होंने आगे कहा था, "अगर सरकार वास्तव में मेरे योगदान को सम्मानित करना चाहती थी, तो मुझे देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देना चाहिए था। मुझे पद्म पुरस्कारों जैसे किसी अन्य सम्मान में रुचि नहीं है।"
एस. जानकी भारतीय संगीत जगत की सबसे प्रतिष्ठित गायिकाओं में गिनी जाती हैं। उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए हैं। अपनी मधुर आवाज और बहुमुखी प्रतिभा के कारण उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत की सबसे प्रभावशाली गायिकाओं में शामिल किया जाता है।
अपने लंबे करियर में उन्होंने कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त किए। उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और नई पीढ़ी के गायकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
पद्म भूषण को अस्वीकार करने का उनका फैसला उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था। कई लोगों ने उनके निर्णय का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत विचार बताते हुए सम्मान का आदर करने की बात कही। इसके बावजूद भारतीय संगीत में एस. जानकी का योगदान आज भी अतुलनीय माना जाता है।
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