पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की बड़ी जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि फाल्टा की मतगणना प्रक्रिया में “स्पष्ट विसंगतियां” दिखाई दी हैं और देश को इसका जवाब मिलना चाहिए।
बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने इस सीट पर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीआई(एम) के उम्मीदवार संभू नाथ कुर्मी को 1,09,021 वोटों के भारी अंतर से हराया। इस जीत के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी की कुल सीटों की संख्या 208 तक पहुंच गई।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि मतगणना की प्रक्रिया संदिग्ध रही। उन्होंने दावा किया कि रविवार दोपहर 3:30 बजे तक सभी 21 राउंड की गिनती पूरी कर ली गई, जबकि 4 मई को इसी समय तक केवल दो से चार राउंड की ही मतगणना हुई थी।
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टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि पिछले दस दिनों में फाल्टा के एक हजार से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बावजूद पार्टी कार्यालयों में खुलेआम तोड़फोड़ की गई, लेकिन चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
अभिषेक बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से नाम हटाए गए और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अधिकारी को बाद में पश्चिम बंगाल सरकार का मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया गया।
टीएमसी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रशासन और पुलिस ने निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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