निलंबित बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए इसकी समाप्ति की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 6 फरवरी तक यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने का जन आंदोलन किया जाएगा।
सोमवार को अग्निहोत्री ने कहा कि हालांकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइंस पर रोक लग चुकी है, लेकिन असली और बड़ा मुद्दा एससी/एसटी एक्ट का उन्मूलन है। उन्होंने दावा किया कि यह लड़ाई राज्य सरकार से नहीं बल्कि केंद्र सरकार से है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार राज्य प्रशासन पर दबाव बनाकर उसे अस्थिर करने का प्रयास कर रही है।
अग्निहोत्री रविवार रात वाराणसी पहुंचे थे, जहां उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य सरकार के साथ भेदभाव कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य के फंड को गुजरात स्थानांतरित करने की तैयारियां की जा रही हैं।
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उन्होंने कहा, “6 फरवरी अंतिम समय सीमा है। यदि तब तक एससी/एसटी एक्ट को समाप्त नहीं किया गया, तो केंद्र सरकार को चार्टर्ड विमान में बैठाकर गुजरात भेज दिया जाएगा।”
अग्निहोत्री हाल ही में प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य के स्नान से जुड़े विवाद के बाद अपने पद से इस्तीफा देने को लेकर चर्चा में रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के प्रतीकों का अपमान देखकर वे चुप नहीं रह सके।
गौरतलब है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम, 2026 पर रोक लगाई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्निहोत्री ने शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव के कथित दुरुपयोग को सामाजिक अशांति का कारण बताया और इसके गंभीर परिणामों की चेतावनी दी।
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