केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार (17 जनवरी 2026) को कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को भारत की ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) का प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समुद्री संसाधनों से जुड़ी संभावनाएं भारत की भविष्य की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएंगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अब तक अप्रयुक्त समुद्री संसाधनों से आर्थिक मूल्य सृजन की संभावनाएं बढ़ती जाएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की लंबी समुद्री तटरेखा और द्वीपीय क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका समुचित उपयोग अब समय की मांग है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का ब्लू इकोनॉमी पर मजबूत फोकस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को दर्शाता है, जिसके अनुसार भारत केवल मुख्य भूमि पर ध्यान देकर विकास नहीं कर सकता, जबकि द्वीपीय क्षेत्रों और तटीय इलाकों को भी साथ लाना होगा। संतुलित और समावेशी विकास के लिए इन क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है।
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अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स (ACOSTI) के दौरे के दौरान वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए जितेंद्र सिंह ने समुद्री प्रौद्योगिकी से जुड़ी कई अहम पहलों का शुभारंभ और समीक्षा की। ये पहलें ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और स्थानीय लोगों की आजीविका में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि डीप ओशन मिशन भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 और 2024 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से डीप ओशन मिशन की घोषणा कर इसकी रणनीतिक महत्ता को रेखांकित किया था।
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