भारत की युवा जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने शुक्रवार को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। त्रिपुरा की रहने वाली 23 वर्षीय अस्मिता ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं।
अस्मिता और हेइडी क्वाच के बीच फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। शुरुआत में भारतीय खिलाड़ी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। क्वाच ने बढ़त हासिल करते हुए अस्मिता पर दबाव बनाया और उन्हें एक युको तथा पेनल्टी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अस्मिता ने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए मुकाबले का रुख बदल दिया।
चार मिनट के मुकाबले के बीच में अस्मिता ने आक्रामक खेल दिखाया और स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। अचानक मृत्यु (सडन डेथ) ओवरटाइम में अस्मिता ने निर्णायक हमला किया और युको हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
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यह भारत का मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स में चौथा स्वर्ण पदक है। अस्मिता की इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। जूडो को 1990 के ऑकलैंड कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल किया गया था, लेकिन अब तक कोई भी भारतीय खिलाड़ी इसमें स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया था।
अस्मिता डे का जन्म 22 मार्च 2003 को दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया में हुआ था। इससे पहले सेमीफाइनल मुकाबले में भी उन्होंने स्कॉटलैंड की सारा एडलिंगटन को कड़े मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्मिता डे को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका प्रदर्शन हमेशा याद रखा जाएगा और इससे भारत में जूडो को और लोकप्रियता मिलेगी।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने भी अस्मिता को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास देश की युवा पीढ़ी को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि अस्मिता की सफलता पूरे त्रिपुरा और भारत के लिए गर्व का क्षण है।
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