ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को शरण देने का फैसला किया है। यह जानकारी ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने मंगलवार (10 मार्च 2026) को दी। ये खिलाड़ी एशियन कप टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया आई थीं, लेकिन इसी दौरान ईरान में युद्ध की स्थिति शुरू हो गई।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के इस फैसले से पहले वहां रहने वाले ईरानी समुदाय और कई मानवाधिकार समूहों ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने सरकार से इन खिलाड़ियों को शरण देने की अपील की थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ऑस्ट्रेलिया से इन खिलाड़ियों की मदद करने का आग्रह किया था।
हालांकि खिलाड़ियों ने सार्वजनिक रूप से शरण मांगने की बात नहीं कही थी, लेकिन हाल की घटनाओं के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया था। एशियन कप के पहले मैच के दौरान जब ईरानी महिला टीम की कुछ खिलाड़ियों ने अपने देश का राष्ट्रगान नहीं गाया, तब ऑस्ट्रेलियाई मीडिया और खेल जगत में इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
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विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रगान न गाने की घटना को ईरान की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और वहां जारी संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अब इन पांच खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर शरण देकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय खिलाड़ियों की सुरक्षा और मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय खेल और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह कदम ईरान और पश्चिमी देशों के संबंधों पर भी असर डाल सकता है।
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