महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की अटकलों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सहयोगी दलों को स्पष्ट संदेश दिया है। पार्टी ने कहा है कि केवल एकजुट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ही एनडीए की सहयोगी बन सकती है, किसी एक गुट को अलग से शामिल करने का सवाल ही नहीं उठता।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने यह रुख ऐसे समय अपनाया है जब यह चर्चा चल रही है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) परिसीमन विधेयक पर कुछ शर्तों के साथ अपना रुख नरम कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित गठबंधन वार्ता की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है कि मौजूदा सहयोगी दलों—मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी—के बीच किसी प्रकार की असुरक्षा की भावना पैदा नहीं होनी चाहिए।
और पढ़ें: पंजाब में भूमि अधिग्रहण नीति को लेकर बीजेपी का विरोध तेज, केवल सिंह ढिल्लों ने प्रभावित किसानों से की मुलाकात
उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भी राजनीतिक दल के विलय के पक्ष में नहीं है। यदि किसी दल का कोई अन्य गुट एनडीए में शामिल होना चाहता है, तो उसे पहले अपने मूल दल के साथ एकजुट होना होगा। इसके बाद ही वह एक संयुक्त राजनीतिक इकाई के रूप में एनडीए का हिस्सा बन सकता है।
भाजपा का यह संदेश महायुति गठबंधन में स्थिरता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि संभावित राजनीतिक बदलावों के कारण उसके मौजूदा सहयोगियों के बीच भ्रम या असंतोष की स्थिति बने।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के इस रुख से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल पार्टी महाराष्ट्र में गठबंधन की मौजूदा संरचना को बरकरार रखना चाहती है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में परिसीमन विधेयक और महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस मुद्दे पर सभी दलों की रणनीति पर नजर रहेगी।
और पढ़ें: हिमाचल में कांग्रेस सरकार कानून व्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर विफल: बीजेपी नेता बिक्रम ठाकुर