मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गुजरात दौरे के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों का जवाब दिया। अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरज का पूरब से उगना एक अटल सार्वभौमिक सत्य है, उसी तरह चुनाव आयोग की प्रक्रियात्मक ईमानदारी भी राजनीतिक हमलों से प्रभावित नहीं होती।
उन्होंने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण मतदान प्रतिशत कृत्रिम रूप से बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में लोगों का स्वेच्छा से मतदान करना भारतीय लोकतंत्र में मतदाताओं के विश्वास को दर्शाता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि मतदाता सूची को व्यवस्थित करने के लिए पुराने रिकॉर्ड और ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर नामों का मिलान जरूरी है। उन्होंने नागरिकता अधिनियम और पुरानी मतदाता सूचियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग पहचान पत्रों में नामों की वर्तनी में अंतर के कारण पैदा हुई विसंगतियों को भी इस प्रक्रिया से दूर किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि वैध मतदाताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सुधार की व्यवस्था की गई है। बूथ स्तर के अधिकारी उचित अनुरोधों पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई कर सकते हैं।
एसआईआर से मतदान प्रतिशत में हेरफेर के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि हालिया पुनरीक्षण के बाद जिला कलेक्टरों के समक्ष एक भी अपील दाखिल नहीं की गई।
उन्होंने 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी पात्र नागरिकों से मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की। गुजरात यात्रा के दौरान उन्होंने साबरमती स्थित गांधी आश्रम और ऐतिहासिक अडालज बावड़ी का दौरा किया। उन्होंने बूथ स्तर के अधिकारियों से भी बातचीत की।
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