संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान सोमवार को राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। संसद मार्ग की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने रोक दिया। इस बीच सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके को न तो हिरासत में लिया गया है और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे थे। जैसे ही वे संसद मार्ग थाना के पास पहुंचे, सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिससे मौके पर तनाव बढ़ गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शास्त्री भवन के पास सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे, ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश रोका जा सके।
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पूरे मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
‘चलो संसद’ मार्च को देखते हुए पूरे मध्य दिल्ली में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। संसद भवन, सरकारी कार्यालयों और संवेदनशील इलाकों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कई गुना बढ़ा दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली जिले में अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की गई हैं। इसके अलावा पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को बुलाकर प्रमुख चौराहों, सरकारी भवनों और संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
20 जून से जारी है आंदोलन
अभिजीत दिपके के नेतृत्व में सीजेपी 20 जून से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। संगठन का आरोप है कि नीट परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, प्रभावित छात्रों को न्याय और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इन्हीं मांगों को लेकर सीजेपी ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया था। हालांकि प्रशासन ने संसद क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर पुलिस की नजर बनी हुई है। सीजेपी का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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