तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शनिवार (24 जनवरी, 2026) को कहा कि उन्हें राज्यपाल की ओर से जिस स्तर के दबाव और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वैसा उनके अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई, एम. करुणानिधि (कलाइग्नर) और जे. जयललिता को भी नहीं झेलना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मौजूदा राज्यपाल का रवैया पूर्ववर्ती राज्यपालों से बिल्कुल अलग है।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि उन्हें राज्यपाल के व्यवहार से गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल जनता के कल्याण के लिए काम करने के बजाय, उस द्रमुक (DMK) सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिसे जनता ने सेवा के उद्देश्य से चुना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पूर्ववर्तियों के कार्यकाल के दौरान भी मतभेद होते थे, लेकिन उस समय के राज्यपालों का आचरण ऐसा नहीं होता था जिससे सरकार के कामकाज को नुकसान पहुंचे। “तब मतभेद होने के बावजूद राज्यपालों ने सरकार को अस्थिर करने या बाधित करने का प्रयास नहीं किया। लेकिन आज स्थिति अलग है, और इसी कारण मुझे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है”।
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एम.के. स्टालिन ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर सरकार के साथ सहयोग करने की होती है। उन्होंने कहा कि जनता ने द्रमुक सरकार को विकास, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए चुना है, लेकिन राज्यपाल का रवैया इन उद्देश्यों के विपरीत दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार तमिलनाडु के लोगों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी और लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संघीय ढांचे की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि तमिलनाडु की जनता सच्चाई को समझती है और राज्य के विकास के लिए द्रमुक सरकार के साथ है।
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