दिल्ली के लोगों को गर्मी से भले कुछ राहत मिली हो, लेकिन अब उन्हें बिजली के बढ़े हुए बिलों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने मासिक पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) की वसूली को मंजूरी दे दी है। इससे पहले यह समायोजन तिमाही आधार पर किया जाता था, लेकिन अब इसे हर महीने लागू किया जाएगा।
इस फैसले के बाद बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) बिजली खरीद लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर मासिक आधार पर डाल सकेंगी। इसका असर अलग-अलग वितरण क्षेत्रों में अलग-अलग होगा।
टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के उपभोक्ताओं के बिजली बिल में लगभग 1 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। वहीं बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) और बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) के क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
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DERC ने अप्रैल 2026 के लिए BRPL को 17.94 प्रतिशत, BYPL को 17.43 प्रतिशत और TPDDL को 16 प्रतिशत PPAC वसूलने की अनुमति दी है।
PPAC एक वैधानिक व्यवस्था है, जिसके तहत कोयला, ईंधन और बिजली खरीद की लागत में वृद्धि का भार उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, देश के 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह व्यवस्था पहले से लागू है।
हालांकि, दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं को इससे कोई अतिरिक्त बोझ नहीं झेलना पड़ेगा। 500 यूनिट तक की खपत पर मिलने वाली सब्सिडी पहले की तरह जारी रहेगी। लेकिन गैर-सब्सिडी वाले घरेलू उपभोक्ताओं और व्यावसायिक ग्राहकों के बिल में 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है।
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण ईंधन और बिजली खरीद की लागत बढ़ी है, जिसके चलते PPAC बढ़ाना आवश्यक हो गया था।
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