तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने नाटो शिखर सम्मेलन से पहले यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था में तुर्की को पूर्ण रूप से शामिल किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यूरोप की रक्षा संरचना और सुरक्षा पहलों में तुर्की की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन कई बार उसके योगदान को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
राष्ट्रपति एर्दोआन ने सोमवार को कहा कि तुर्की को यूरोप की सभी रक्षा और सुरक्षा पहलों में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि नाटो सदस्य देशों के बीच रक्षा व्यापार पर लागू सभी प्रतिबंध समाप्त किए जाएं, ताकि सदस्य देश बेहतर सैन्य सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान कर सकें।
एर्दोआन का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरे के मद्देनजर अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। साथ ही, अमेरिका की नाटो में संभावित सीमित भूमिका की आशंका के बीच यूरोपीय देश अपनी सामूहिक सुरक्षा रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं।
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इसी पृष्ठभूमि में 7 और 8 जुलाई को तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो का महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में यूरोप की सुरक्षा, रक्षा सहयोग, रूस से जुड़े सुरक्षा मुद्दों और नाटो की भविष्य की रणनीति पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
राष्ट्रपति एर्दोआन ने कहा कि तुर्की लंबे समय से यूरोप की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। ऐसे में महाद्वीप की रक्षा नीति और सुरक्षा ढांचे में उसकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी मुकाबला तभी संभव है, जब सभी नाटो सहयोगी बिना किसी भेदभाव के मिलकर काम करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी नाटो शिखर सम्मेलन में तुर्की की इन मांगों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है और इससे यूरोप की सामूहिक सुरक्षा रणनीति पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।
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