हिमाचल प्रदेश सरकार नई औद्योगिक नीति तैयार कर रही है, जिसमें हरित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण और रक्षा कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि नई नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देना है, जो पर्यावरण के अनुकूल हों और अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करें।
मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि सरकार उन उद्योगों को प्रोत्साहित करेगी, जिनसे राज्य में रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि नई नीति में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को विशेष महत्व दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक बिजली और पानी की खपत करने वाले उद्योगों को नई औद्योगिक नीति के तहत हतोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्टील और इथेनॉल जैसे अधिक संसाधन खपत वाले उद्योगों को सीमित प्रोत्साहन दिया जाएगा।
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इसके बजाय सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, हरित ऊर्जा आधारित परियोजनाओं और ऐसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है, जिनमें स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उद्योगों का विकास किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति में रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों के लिए भी संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। डिफेंस कॉरिडोर के विकास से राज्य में निवेश आने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल को एक ऐसे औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बना रहे।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि नई नीति तैयार करते समय उद्योग जगत, विशेषज्ञों और संबंधित विभागों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि नीति राज्य की जरूरतों के अनुरूप हो और लंबे समय तक आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सके।
नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद हिमाचल प्रदेश में निवेश बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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