पश्चिम बंगाल के नौदा से विधायक हुमायूं कबीर ने सक्रिय राजनीति छोड़ने और विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को मुर्शिदाबाद के रेजीनगर उपचुनाव के दौरान करीब 12 घंटे तक हिरासत में रखे जाने और कथित तौर पर अपमानित किए जाने से वह बेहद आहत हैं। कबीर ने कहा कि वह दुर्गा पूजा के बाद नौदा के लोगों की बैठक बुलाएंगे, उनसे माफी मांगेंगे और राजनीति छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा करेंगे।
कबीर ने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने जीत और हार दोनों देखी हैं और दोनों को स्वीकार किया है। हालांकि, रेजीनगर उपचुनाव के दौरान हुई घटनाओं ने उन्हें अंदर तक परेशान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया और वहां ‘वोट लूट’ हुई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं को विशेष बैज दिए और उन्हें कथित तौर पर वोट कब्जाने की गतिविधियों में शामिल होने दिया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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कबीर ने सवाल उठाया कि अगर वह व्यवस्था के कथित अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते, तो विधायक बने रहने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उन्हें करीब 12 घंटे हिरासत में रखा और वह इस घटना को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
पुलिस ने मतदान शुरू होने के करीब एक घंटे बाद रेजीनगर स्थित उनकी पार्टी के कार्यालय के सामने से कबीर को हिरासत में लिया था। कानून के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई की गई थी। उन्हें करीब 12 घंटे बाद रात लगभग 8 बजे रिहा किया गया।
2026 के विधानसभा चुनाव में कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी, जिसके कारण उपचुनाव हुआ।
64 वर्षीय कबीर ने कहा कि दुर्गा पूजा के बाद नौदा में लोगों की बैठक बुलाकर वह उनसे माफी मांगेंगे और राजनीति से विदाई की घोषणा करेंगे। उनके बयान से संकेत मिलता है कि रेजीनगर उपचुनाव की घटनाओं ने उनके राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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