भारत अगले 25 से 30 वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल (सेवानिवृत्त) करमबीर सिंह का मानना है कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को सबसे पहले अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के क्षेत्र में अपनी क्षमता को मजबूत करना होगा।
एक विशेष साक्षात्कार में एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि हथियार निर्यात की सफलता काफी हद तक अनुसंधान एवं विकास पर निर्भर करती है। उनके अनुसार, यदि भारत के पास अत्याधुनिक अनुसंधान तंत्र नहीं होगा तो वह वैश्विक स्तर के आधुनिक और उन्नत हथियार विकसित नहीं कर पाएगा।
उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन आज दुनिया का विनिर्माण केंद्र इसलिए बन पाया क्योंकि उसने अनुसंधान एवं विकास पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने माना कि भारत सरकार इस क्षेत्र में निवेश कर रही है, लेकिन पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार की आवश्यकता है। इसमें शैक्षणिक संस्थान, रक्षा उपयोगकर्ता, उद्योग जगत और निवेशक सभी शामिल हैं।
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भारत के 24वें नौसेना प्रमुख रहे करमबीर सिंह ने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले यह क्षेत्र मुख्य रूप से सार्वजनिक उपक्रमों तक सीमित था, लेकिन अब निजी क्षेत्र के लिए भी अवसर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत जहाज निर्माण, सह-उत्पादन और सह-विकास जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ सकता है। दक्षिण कोरिया, जापान और चीन वर्तमान में जहाज निर्माण क्षेत्र में अग्रणी हैं, लेकिन भारत के पास युवा आबादी का बड़ा लाभ है।
एडमिरल सिंह ने स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि यदि सरकार, निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थान मिलकर काम करें, तो भारत वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में एक बड़ी शक्ति बन सकता है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई ऊंचाई दे सकता है।
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