भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों दो दिवसीय मंगोलिया दौरे पर हैं, जहां उनका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और विकासात्मक सहयोग को और मजबूत करना है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मंगोलिया के चीन के साथ भी गहरे आर्थिक और व्यापारिक संबंध हैं, इसलिए इसे कूटनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. जयशंकर ने बताया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख के बीच पिछले वर्ष हुई बातचीत के आधार पर लिए गए निर्णयों और उनकी प्रगति की समीक्षा करना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और मंगोलिया केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और लोगों के बीच मजबूत संपर्क पर आधारित बताया।
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जयशंकर ने विशेष रूप से मंगोलिया में बन रही तेल रिफाइनरी परियोजना का उल्लेख किया। यह परियोजना डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी क्षेत्र में विकसित की जा रही है। इसके लिए भारत सरकार ने 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की रियायती ऋण सहायता (एलओसी) उपलब्ध कराई है। यह भारत की वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट परियोजनाओं में से एक है।
मंगोलिया दुनिया के सबसे खनिज संपन्न देशों में गिना जाता है। यहां तांबा, सोना, कोयला और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारत अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यूरेनियम आपूर्ति को लेकर भी मंगोलिया के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। ऐसे में जयशंकर का यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
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