भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत भारत के सभी निर्यात उत्पादों को न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा। इससे एमएसएमई सेक्टर को भी मजबूती मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सरकार के अनुसार, यह समझौता अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसके अलावा, आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 वीजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें वे तीन साल तक काम कर सकेंगे।
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भारत के लिए यह समझौता खास इसलिए भी है क्योंकि न्यूजीलैंड का औसत आयात शुल्क मात्र 2.3 प्रतिशत है, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
वहीं, न्यूजीलैंड को भी इस समझौते से लाभ मिलेगा। भारत ने 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देने का प्रस्ताव दिया है। न्यूजीलैंड के कई उत्पाद जैसे ऊन, कोयला, और लकड़ी से बने सामान सस्ते हो सकते हैं।
इसके अलावा सेब, कीवी, शहद और समुद्री उत्पादों पर भी चरणबद्ध तरीके से शुल्क में छूट दी जाएगी। हालांकि संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य जैसी शर्तें लागू रहेंगी।
यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा और वैश्विक व्यापार में नई संभावनाएं खोलेगा।
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