सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में स्थित आसाराम आश्रम की जमीन को लेकर चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि इस मामले में यथास्थिति (status quo) बनाए रखी जाए और कोई भी जबरन कार्रवाई न की जाए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने नगर पालिका प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) पर भी गंभीर टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक रूप से कहा कि यह नोटिस “प्रथम दृष्टया (prima facie) आवश्यक तथ्यों और सामग्री विवरणों से रहित प्रतीत होता है।” अदालत के अनुसार, नोटिस में वे आवश्यक आधार स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए हैं जिनके आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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इस टिप्पणी के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जब तक मामले की पूरी तरह से सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह मामला गुजरात में आश्रम की जमीन से जुड़े विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार नहीं की जा रही है और उन्हें उचित अवसर नहीं दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इस बात का संकेत है कि किसी भी संपत्ति विवाद या प्रशासनिक कार्रवाई में प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन आवश्यक है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई में सभी पक्षों को अपने-अपने तर्क और दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से आश्रम प्रबंधन को राहत मिली है और प्रशासनिक कार्रवाई पर अस्थायी रोक लग गई है।
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