दुनिया में सबसे अधिक बाघों की आबादी वाले भारत में वर्ष 2025 के दौरान 166 बाघों की मौत हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 अधिक है। यह जानकारी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नवीनतम आंकड़ों में सामने आई है। वर्ष 2024 में देश में 126 बाघों की मौत दर्ज की गई थी।
आंकड़ों के अनुसार, देश का ‘टाइगर स्टेट’ कहलाने वाला मध्य प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 55 बाघों की मौत हुई। इसके बाद महाराष्ट्र में 38, केरल में 13 और असम में 12 बाघों की मौत दर्ज की गई। मरने वाले कुल 166 बाघों में 31 शावक (कब्स) शामिल थे।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच क्षेत्र को लेकर होने वाली आपसी लड़ाई (टेरिटोरियल इनफाइटिंग) मौतों का प्रमुख कारण है। विशेषज्ञ जयराम शुक्ला के अनुसार, देश में बाघों की संख्या संतृप्ति के स्तर पर पहुंच रही है और उनके पास नए इलाकों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचा है। मध्य प्रदेश में 2014 के बाद बाघों की संख्या में लगभग 60% की वृद्धि हुई है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ा है।
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NTCA के अनुसार, वर्ष 2025 की पहली बाघ मृत्यु 2 जनवरी को महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी वन मंडल में दर्ज की गई थी, जबकि सबसे हालिया मौत 28 दिसंबर को मध्य प्रदेश के उत्तर सागर क्षेत्र में हुई।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत में बाघों की संख्या 2018 में 2,967 से बढ़कर 2022 में 3,682 हो गई थी। देश में विश्व के लगभग 75% बाघ पाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभरंजन सेन ने बताया कि राज्य में हर बाघ मृत्यु को शिकार का मामला मानकर जांच की जाती है, जब कि इसके ठोस सबूत न मिले। उन्होंने कहा कि अधिकांश मौतें प्राकृतिक कारणों, आपसी संघर्ष और विस्थापन के दौरान होती हैं, जबकि कुछ मामले करंट लगने और गैर-इरादतन शिकार से जुड़े पाए गए हैं।
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