भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कृषि क्षेत्र में उठ रही आशंकाओं के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते से भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और घरेलू किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत ने कृषि आयात को लेकर बेहद सतर्क और अपनी दीर्घकालिक व्यापार नीति के अनुरूप रुख अपनाया है।
सरकारी अधिकारी के अनुसार, भारत अपनी स्थापित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) रूपरेखा का पालन कर रहा है, जिसमें संवेदनशील कृषि उत्पादों को विशेष सुरक्षा दी जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू किसानों पर अचानक आयात का दबाव न पड़े, जबकि कम जोखिम वाले क्षेत्रों में सीमित उदारीकरण किया जा सके।
अधिकारी ने बताया कि केवल उन्हीं कृषि उत्पादों को तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच दी जाएगी, जिन्हें सबसे कम संवेदनशील माना जाता है। ऐसे उत्पादों को भारत पहले से ही अपने कई एफटीए साझेदारों, जिनमें यूनाइटेड किंगडम भी शामिल है, को रियायत देता रहा है।
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भारत-अमेरिका कृषि व्यापार की स्थिति को मजबूत बताते हुए अधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत को लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त है। भारत हर साल अमेरिका को लगभग 3.4 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि अमेरिका से आयात करीब 2.1 अरब डॉलर का है। यह संतुलन वैश्विक मांग को पूरा करने में भारतीय कृषि की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “यह समझौता हमारे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए कृषि निर्यात की स्थिति को और मजबूत करेगा।” साथ ही रोजगार-प्रधान निर्यात क्षेत्रों के लिए भी व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित की गई है, जो पहले 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ से प्रभावित थे। इससे भारत को वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, मलेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिलेगी।
इस मुद्दे पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि और डेयरी क्षेत्रों से जुड़े लोगों के हितों की सक्रिय रूप से रक्षा की है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और डेयरी, को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
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