मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल के कारण फैली उल्टी-दस्त की बीमारी ने एक ऐसे मासूम की जान ले ली, जिसका जन्म परिवार ने 10 साल की मन्नतों और दुआओं के बाद पाया था। कुछ ही दिनों में छह महीने के शिशु अव्यान साहू की मौत हो गई, जिससे परिवार गहरे शोक में डूब गया है।
भगीरथपुरा क्षेत्र के मराठी मोहल्ले की एक गली में सन्नाटा पसरा हुआ है, जहां अव्यान अपने परिवार के साथ रहता था। पैकेट वाले दूध को नल के पानी से पतला करना एक साधारण-सा कदम था, लेकिन वही उसके जीवन पर भारी पड़ गया। परिवार का आरोप है कि नगर निगम की पानी की सप्लाई दूषित थी, जिससे बच्चे को गंभीर संक्रमण हुआ।
सरकार ने इस घटना के बाद मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है, लेकिन साहू परिवार ने यह मुआवज़ा लेने से इनकार कर दिया है। अव्यान की दादी कृष्णा साहू ने कहा, “हमने सरकार से कोई मुआवज़ा नहीं लिया। हमारा बच्चा चला गया, क्या पैसे उसे वापस ला सकते हैं? बच्चे से बड़ा कोई धन नहीं होता।” उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने 10 साल की मन्नतों और दुआओं के बाद अव्यान को जन्म दिया था।
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कृष्णा साहू ने रोते हुए बताया कि पूरा परिवार हुसैन टेकरी दरगाह में मन्नत मानकर उसकी सलामती की दुआ करता था। अव्यान पूरी तरह स्वस्थ था और उसका वजन लगभग पांच किलो हो गया था। अचानक उसे दस्त की शिकायत हुई। डॉक्टर की सलाह पर घर में दवाइयां दी गईं, लेकिन हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार ने बताया कि मां के दूध की कमी के कारण बच्चे को पैकेट दूध और मिल्क पाउडर नल के पानी में मिलाकर दिया जा रहा था। पड़ोसी अनीता सेन ने कहा कि इलाके में कई छोटे बच्चे हैं और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दूषित पानी के कारण किसी मां से उसका बच्चा न छीना जाए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि बीते एक साल में दूषित पानी से फैली बीमारी से 15 लोगों की मौत हुई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अब तक केवल चार मौतों की पुष्टि की है। बीते नौ दिनों में 1,400 से अधिक लोग उल्टी-दस्त से प्रभावित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 272 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए गए थे, जिनमें से 71 को छुट्टी मिल चुकी है, जबकि कई मरीज अभी आईसीयू में इलाजरत हैं।
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