चीन ने बिना युद्ध छेड़े ही अमेरिका के F-35 लड़ाकू जेट और हाईटेक हथियारों को प्रभावित करने की रणनीति तैयार की है। यह जानकारी 5 मार्च 2026 को चीन की राष्ट्रीय जनसभाओं में पेश 141-पृष्ठीय 15वीं पंचवर्षीय योजना में सामने आई। योजना में अगली पीढ़ी की आर्थिक और सैन्य ताकत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ह्यूमैनॉइड रोबोटिक्स, क्वांटम संचार नेटवर्क और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीकों को प्राथमिकता दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल आर्थिक नीति नहीं बल्कि चीन का “युद्ध योजना” है, जिसका उद्देश्य अमेरिका के सामरिक फोकस को कमजोर करना है। चीन ने अपने दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare-Earth Elements) के उत्पादन और निर्यात पर नियंत्रण कड़ा कर लिया है। ये तत्व F-35 जेट, मिसाइल डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के लिए अनिवार्य हैं।
विश्लेषक शानाका अन्सलेम पेरेरा का कहना है कि अमेरिकी CHIPS एक्ट केवल सेमीकंडक्टर पर केंद्रित है, जबकि चीन की योजना पूरे उद्योग और प्रौद्योगिकी क्षेत्र को कवर करती है। AI और रोबोटिक्स के जरिए चीन लंबी अवधि के लिए आर्थिक और सैन्य ताकत को सुनिश्चित करना चाहता है।
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अमेरिका ईरान जैसे युद्धों में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का भारी उपयोग कर रहा है, जबकि चीन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर इसे नियंत्रित कर रहा है। पेरेरा का निष्कर्ष है कि भविष्य में वैश्विक शक्ति का मुकाबला न तो गल्फ में और न ही हवाई युद्ध में, बल्कि आपूर्ति श्रृंखलाओं और फैक्ट्रियों में तय होगा।
यदि चीन इसमें सफल होता है, तो F-35 जेट कभी उड़ने से पहले ही अमेरिकी सामरिक क्षमताओं पर उसका नियंत्रण प्रभाव डाल देगा, जिससे अगली वैश्विक महाशक्ति का खेल बड़े पैमाने पर तकनीकी और औद्योगिक शक्ति पर आधारित होगा।
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