विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों में आतंकवाद के मुद्दे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को लेकर पर्याप्त समझ और संवेदनशीलता नहीं होने का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर पड़ सकता है। उन्होंने यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के समापन के बाद न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में की।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रमुख सदस्यों और नीति विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चा में जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों की मौजूदा स्थिति और व्यापार तथा शुल्क से जुड़े मतभेदों के बारे में पूछा गया था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए सामने मौजूद मुद्दों का समाधान करना जरूरी है।
जयशंकर ने आतंकवाद को भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण चिंता बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने लंबे समय से पड़ोसी देश से आने वाले आतंकवाद का सामना किया है और यह भारत के लिए एक प्रमुख सुरक्षा चुनौती है। उनके इस बयान को पाकिस्तान के साथ अमेरिका के हालिया बढ़ते संपर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि यदि भारत के किसी प्रमुख सुरक्षा मुद्दे को उसका साझेदार पर्याप्त रूप से समझता या उसकी गंभीरता को स्वीकार नहीं करता, तो इसका असर रिश्ते पर पड़ना स्वाभाविक है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है और दोनों पक्षों को मतभेदों से जुड़े मुद्दों पर काम करने की आवश्यकता है।
भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले समय में व्यापार शुल्क, रूसी ऊर्जा की खरीद और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संपर्क सहित कई मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। एशिया सोसाइटी के विश्लेषण में भी 2025 के बाद भारत-अमेरिका संबंधों पर शुल्क और पाकिस्तान से जुड़े घटनाक्रम के प्रभाव का उल्लेख किया गया है।
जयशंकर ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ संबंधों को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है, लेकिन इसके लिए दोनों देशों को उन मुद्दों को वास्तविकता के साथ संबोधित करना होगा, जिन पर मतभेद हैं। उन्होंने संकेत दिया कि साझा चिंताओं की बेहतर समझ और आपसी समन्वय से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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