केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को शुरू होने से रोक रहे हैं, ताकि बाजार पर अपना एकाधिकार बनाए रख सकें। सिंधिया ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता।
सिंधिया के अनुसार, सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए किसी एक कंपनी को विशेष प्राथमिकता नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि रिलायंस जियो, वनवेब और स्टारलिंक को लाइसेंस मिल चुके हैं। इसके अलावा, अमेजन भी इस क्षेत्र में लाइसेंस प्राप्त करने की इच्छुक है, लेकिन उसे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
सैटेलाइट इंटरनेट की कीमतों पर फैसला जल्द
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए मूल्य निर्धारण का ढांचा तय करने के करीब है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्टारलिंक सहित सभी लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। अंतिम मूल्य निर्धारण और सुरक्षा मंजूरी के बाद ही सेवाओं के व्यावसायिक संचालन का रास्ता साफ होगा।
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2030 तक एक अरब 5जी उपयोगकर्ताओं का लक्ष्य
सिंधिया ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र के भविष्य पर भी बात की। उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य 2030 तक 5जी उपयोगकर्ताओं की संख्या 55 करोड़ से बढ़ाकर एक अरब करना है। उनके मुताबिक, भारत 4जी के मामले में दुनिया से पीछे रह गया था, लेकिन अब 6जी तकनीक में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एलन मस्क ने क्या कहा था?
स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच पर आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी भारतीय उपभोक्ताओं को किफायती और तेज इंटरनेट से वंचित रखने के लिए स्टारलिंक की सेवाओं में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने इसे भारतीय जनता के हितों के खिलाफ बताया था। मस्क का दावा था कि स्टारलिंक उन लोगों को भी इंटरनेट उपलब्ध करा सकता है, जो मौजूदा कीमतें वहन नहीं कर सकते या जिनके पास कनेक्शन नहीं है।
मणिपुर में उग्रवादियों द्वारा स्टारलिंक उपकरणों के इस्तेमाल के दावों को भी मस्क ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत के ऊपर स्टारलिंक की सैटेलाइट किरणें बंद हैं, इसलिए उपकरणों के इस्तेमाल संबंधी आरोप गलत हैं।
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