राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में हाल ही में हुए आंगनवाड़ी बहिष्कार की घटना को गंभीरता से उठाया। उन्होंने बताया कि जब एक शिक्षित दलित महिला को आंगनवाड़ी केंद्र में सहायक और रसोइया के रूप में नियुक्त किया गया, तो कुछ माता-पिता ने अपने बच्चों को उस केंद्र में भेजने से मना कर दिया। इसके परिणामस्वरूप आंगनवाड़ी केंद्र लगभग तीन महीने तक बंद रहा।
खड़गे ने इस घटना को जातीय भेदभाव की शर्मनाक मिसाल बताते हुए कहा कि यह न केवल व्यक्तिगत सम्मान और करियर की प्रगति को प्रभावित करता है, बल्कि लोगों की सुरक्षा और समाज में समानता के मूल सिद्धांतों के लिए भी खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी में जब हम सामाजिक विकास, सुधार और हिंदू एकता की बात कर रहे हैं, तब भी किसी समुदाय के लोग यह स्वीकार नहीं कर पा रहे कि उनके बच्चों को दलित महिला द्वारा तैयार किया गया खाना मिले।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि कार्यस्थलों और संस्थानों में बढ़ते जातीय भेदभाव के खिलाफ तुरंत कदम उठाए जाएं। खड़गे ने कहा कि समाज में समानता और समावेशिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, और ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई न होना लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के लिए खतरा है।
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राज्यसभा में उन्होंने यह मुद्दा ज़ीरो ऑवर के दौरान उठाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस दलित अधिकारों और समानता के मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा। खड़गे का यह बयान देश में सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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